गजल

उनके होंठ से निकली एक नाम था
मेरे नाम के साथ फिर इल्जाम था

जी चाहता जाउँ फिर उस शहर मे
पर उनकी गली मे मै बदनाम था

भवंरा नही हुँ मै हुँ मै एक परवाना
मोहब्बत मे जलना हर शाम था

बदकिस्मती मेरी मुझे शैतान सम्झी
वो थी एक शहजादी और मै गुलाम था

उनके बिना जिंदगी हुई कुछ ऐसी
महफिल जमी और खाली जाम था

हरि पौडेल
नेदरल्याण्ड

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