निकाह

निकाह

मैयत बनाकर मेरी सब डोली सजा रहे हैं
अपने ही लाडली को देखो कैसे सता रहे हैं

उठाले या अल्लाह चाहे जहन्नुम ही देदे मुझे
आतिसबाजी करते जैसे गोली चला रहे हैं

कबुल कैसे करूँ निकाह तूँ ही बता मेरे खुदा
मुल्लाह पूछ पूछ कर इधर दिल जला रहे हैं

मेरे महबूब भी उधर कुर्बान होने को बैठे है
कैसे बिताउँ जिंदगी उससे जो बोली लगा रहे हैं

बेटी बनाकर भेजा जहा पूछते नही मर्जी उसकी
अपने ही घर के फूल को गटर मे बहा रहे हैं

हरि पौडेल
नेदरल्याण्ड

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