“हम न हिन्दू- न इसाई, न मुसलमान दोस्तों “

हम न हिन्दू- न इसाई, न मुसलमान दोस्तों।

खुदा के नेक बन्दे हम, इंसान दोस्तों ।।

 

इंसानियत ही एक मात्र धर्म मेरा है ।

मानव के हेतु जी सकूँ, ये कर्म मेरा है ।।

जाति-पाति-धर्म सब, बकवास की बातें ।

परहित के काम आ सकूँ, ये मर्म मेरा है ।।

 

मेरा यही कुटुम्ब है जहां दोस्तों ।

खुदा के नेक बन्दे हम, इंसान दोस्तों ।।

 

न आपस में घृणा-द्वेष की, दूकान सजाओ ।

न भेदभाव जुल्म के, बागान लगाओ ।।

न आँगन में बटवारे की, दीवार खड़ी हो ।

आपस में भाई-चारे की, ज्योति जगाओ ।।

 

तभी तो बन सकोगे, तुम महान दोस्तों ।

खुदा के नेक बन्दे हम, इंसान दोस्तों ।।

 

आपस में भाई-चारे का, कुटुम्ब बँट गया ।

अफसोस भाई-भाई के, हाथों ही कट गया ।।

भाई-भाई के खून, प्यासे हैं बन गए,

इंसान के लहू से, भूगोल पट गया ।।

 

इंसान हो तुम न बनो हैवान दोस्तों ।

खुदा के नेक बन्दे हम, इंसान दोस्तों ।।

 

– रचनाकार :: मनमोहन बाराकोटीतमाचा लखनवी

4 Comments

  1. सुनील लोहमरोड़ Sunil Kumar Lohamrod 27/01/2014
    • Man Mohan Barakoti 28/01/2014
    • Man Mohan Barakoti 31/01/2014

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