खजाने की खोज

देश को लूटा , जमकर लूटा ।
फिर भी इनका घडा न फूटा ।।
जब कुछ नहीं बचा तो नया नया सोच रहे हैं।
सुना है किलों में खजाना खोज रहे हैं ।
मैने खजाने से पूछा –
प्रिय खजाना श्रीमान।
क्यों कर रह हो सरकार द्वय को परेशान।
जल्दी से ऊपर आ जाओ ।
सरकार के रिक्त भणडार को भर जाओ ।
कुछ नहीं तो देश की हालत पे तरस खाओ।
कर्ज में डूबा है , निजात दिलाओ ।
खजाना बोला- मैं तो भारत की रत्नगर्भा वसुन्धरा के कण कण में विद्यमान हूं ।
पर क्या करूं ,हरामखोर नेताओं से परेशान हूं।
इसलिये हम इनके हाथ आयें गे नहीं।
और ये लाख खोदे पर हमें पायें गे नहीं।

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