“अमर है तुलसी का कृतित्व”

गगन में जब तक है आदित्य।
और विद्वानों में पांडित्य।।
विधा अवधी में मानस श्रेष्ठ।
अमर है तुलसी का साहित्य।।

अमर है तुलसी का कृतित्व।
अमर उनके कृत का अस्तित्व।।
अमर रामचरित मानस उनका ग्रंथ।
अमर कवि तुलसी का व्यक्तित्व।।

आज जो मानस के मर्मग्य।
हैं चर्चित प्रवचन में सर्वग्य ।।
करोड़ों के स्वामी वे आज।
स्वार्थ में भूल गए कर्तव्य।।

बन गए स्वादु मौका गाँठ।
प्रवचन रामायण का पाठ।।
बना इसको अपना व्यवसाय।
आधुनिक कुछ संतों के हैं ठाठ।।

आज यदि तुलसी होते काश।
स्वादुओं के बनते उपहास।।
देखकर तुलसी का दारिद्र।
उन्हें न आने देते पास।।

है अच्छा तुलसी का अवसान।
हुआ न उनसा संत महान।।
आज यदि जीवित होते यहाँ।
सहन न कर पाते अपमान।।

– रचनाकार ::  मनमोहन बाराकोटी ‘तमाचा लखनवी’

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  1. kiranwaljee 29/01/2014

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