“आदित्य के बिना यहाँ……”

आदित्य के बिना यहाँ, होती सुबह नहीं।
दुश्मन को न मिले सजा, कोई वजह नहीं।।
रहने का कोई हक नहीं, उसको है देश में-
गद्दार के लिए यहाँ, …..कोई जगह नहीं।।
– रचनाकार ::  मनमोहन बाराकोटी “तमाचा लखनवी”

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