“कवि”

कवि किसी सीमा में बंध के, रह नहीं सकता।
हो रहे अन्याय को वह, ……सह नहीं सकता।।
लेखनी का वो धनी, निष्पक्ष लिक्खेगा वही-
तूफान के झूठे भंवर में,….. बह नहीं सकता।।
– रचनाकार :: मनमोहन बाराकोटी “तमाचा लखनवी”

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