माँ वाणी वन्दना

माँ वाणी वन्दना

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मेरे मन के मन मन्दिर में,
माँ वाणी तुम आओ।
मानस तिमिर महासागर में,
ज्ञानालोक जगाओ।
चहुंदिशि आज विषमता फैली,
समता का हो रहा क्षरण है।
अन्यायों के दमन चक्र में,
मानव का हो रहा मरण है।
बनूँ सत्‍य पथ का अनुगामी,
ऐसी राह दिखाओ।
मेरे मन के मन मन्दिर में,
माँ वाणी तुम आओ।
मानस तिमिर महासागर में,
ज्ञानालोक जगाओ।
सदा प्यार के दीप जलाऊं,
ईर्ष्या का हर भाव मिटा दो।
धन्य हो सके जीवन मेरा,
अवरोधों को काट हटा दो।
शाश्‍वत प्रेम की कल्पना मेरी,
वाणी मधुर बनाओ।
मेरे मन के मन मन्दिर में,
माँ वाणी तुम आओ।
मानस तिमिर महासागर में,
ज्ञानालोक जगाओ।
कुंठन घुटन निराशा में अब,

हर मानव प्रतिक्षण आकुल है।
दानवता के महापाश में,
जकड़ा मनुज और व्याकुल है।
प्रखर लेखनी कर दो मेरी,
ऐसा योग्य बनाओ।
मेरे मन के मन मन्दिर में,
माँ वाणी तुम आओ।
मानस तिमिर महासागर में,
ज्ञानालोक जगाओ।
– मनमोहन बाराकोटी “तमाचा लखनवी”

2 Comments

  1. Sukhmangal Singh sukhmangal 03/03/2015
    • Man Mohan Barakoti 26/07/2016

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