लहरा के कहता है तिरंगा – बाल कविता

लहरा के कहता है तिरंगा सब जवानों आज तो
तुम्हें बचाना है अपनी भारत माँ की लाज को

पी कर जिसके दूध को बने करमचंद से महात्मा
भगतसिंह सुभाष को जिसने ममता के रंग में रंगा
उसी गोद ने बनाया लाल-बाल-पाल के अंदाज़ को
लहरा के कहता है तिरंगा….

जिसके खेतों में लहलहाये नेहरु चाचा का गुमाँ
उस पावन धरती को कहें हम अपनी भारत माँ
यहाँ राम का धनुष प्रेम करे कृष्ण के साज़ को
लहरा के कहता है तिरंगा….

आओ खाएं कसम कि हिन्दू मुस्लिम भाई हैं
विज्ञान और संस्कार हमारी सच्ची कमाई है
कन्या वध से ना करेंगे गन्दा इसके ताज को
लहरा के कहता है तिरंगा….

भारत माँ को फिर सोने की चिड़िया बनायेंगे
मेहनत लगन से अपनी संस्कृति को बचायेंगे
कोई न रोक पायेगा हम बच्चों की आवाज़ को
लहरा के कहता है तिरंगा….

2 Comments

  1. सुगंधा नायक 27/01/2014

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