गजल

याद आहि जाती वह मुलाक़ात कभी कभी
बहुत रुलाती वह जजबात कभी कभी
उन्हें भूलनेकी कोई बजह भी तो मिले
सोने न देती वह खुरापात कभी कभी
उनके चौखट से ही हो गए कंगाल हम
वरना हम भी करते वहा इरसाद कभी कभी
गीला नही कोई जो फिदरत हुई मेरी
होते है इश्क मे भी बरबाद कभी कभी
दर्दे जिस्म लेकर ही होने दो मुझे दफन
याद आती होगी उन्हें ये फरियाद कभी कभी
हरि पौडेल
नेदरल्याण्ड

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