मोहब्बत कि तौहीन

नासूर मेरे दिल कि दिखाकर क्या करूंगा
अपने ही मोहब्बत कि तौहीन ही तो होगी
गड़े हुए मुर्दों को जगा कर क्या करूंगा
अपने ही मोहब्बत कि तौहीन ही तो होगी

किस्मत ही फुटनी थी चलो मेरी ही सही फूटी
उसकी औकात उसको जताकर क्या करूंगा
अपने ही मोहब्बत कि तौहीन ही तो होगी

शराफत सोचकर ही खुद पि लिया जहर
नंगेको और नंगा दिखाकर क्या करूंगा
अपने ही मोहब्बत कि तौहीन ही तो होगी

सजाए मौत भी मिले मुझे कोई गम नही
उसकी सजा उसको दिलाकर क्या करूंगा
अपने ही मोहब्बत कि तौहीन ही तो होगी

हरि पौडेल
नेदरलैंड

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