संघातिक नैन

संघातिक हैं नैन तुम्हारे,
जब से नज़र मिलाई तुमने–
दुर्दिन आये हमारे . . . . संघातिक ……।

कनखइयों से मारी दीठ,
मुस्काईं फिर देकर पीठ।
उतराए सीधे मेरे मन,
चंचल नयन तुम्हारे ढीठ।
वक्र भंगिमा अड़ गई मन में–
निकरी नहीं निकारे . . . . संघातिक …….।

बिन काजल कजरारे नैन,
कर देते हैं मुझको बेचैन।
फंस गई जान कफस में मेरी,
बदलते करवट बीतति रैन ।

घूमूं दिन भर बना बावला –
ज्यों ज्वारी धन हारे . . . . संघातिक ……..।

अब और न मुझे सताओ तुम,
एक दया दिखलाओ तुम।
नहीं निहारो वक्र दृष्टि से,
मृत्यु बिन आई से मुझे बचाओ तुम।
बे मौत न मारा जाऊं–
तेरी तिरछी नजर के मारे ……संघातिक ……।

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