दर्द से भरी ज़िन्दगी को उनके पहचान दो तुम

दर्द से भरी ज़िन्दगी को उनके पहचान दो तुम
अपनी सुख को कम करके उनका हाथ थाम दो तुम
रब की ख्वाहिसे है बस की उनका नूर बरसे सब पर
आवाज गैब को सुनों और खुद की परछाई उनसे हटा दो तुम
खान ए ख़ुदा पे फूलों का ढेर रखते है हम सब
इन फूलों को दफ़िना का रूप मिले और इसे उनके गले में लिपट जाने दो तुम ।
हर महरुक के लिए मरहम बनों
हर महरूम के लिए महरम बनों
जो गलतियाँ हुई अब तक उसे भूल जाओ
और वहदते-वजूद को अब चाँदनी रात में खुल कर मुस्कुराने दो तुम

।।शिव कुमार सिंह।।

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