कोई मतवाला मस्त हुआ बिन पंख हवा में उड़ने से

कोई मतवाला मस्त हुआ बिन पंख हवा में उड़ने से
उड़ उड़ के वो नभ को नापा फिर किया प्रफुल्लित मुड़ने से
लोगों की भाव लटक गई अब आसमान के बादल में
फ़ूल खिले दिल के उपवन में ,उपवन के नभ में खिलने से
दिया दीप लोगों को गगन के उस मस्ताने ने
अब हुए चकित जग के चेतन बाँहों में पंख के उगने से
सब जड़ थे कल ,पर अब जीवन का संचार है जड़ में
कुछ और नहीं बदलाव है दिल में
उस मस्ताने मतवाले के बिन पंख हवा में उड़ने से

।।शिव कुमार सिंह।।

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