—इस राजस्थान से—

—————-इस राजस्थान से———–

……………….ये गर्मी की तेज लू,
……….हर कोई इनसे दुखी, हर प्राणी परेशान,
………….दूर दूर तक फैला रेगिस्तान,
…………पेड़-जल का नहीं नमो-निशान,
..फिर भी अच्छा है सबसे, हमारा प्यारा राजस्थान ।

……..तपिश में नहीं चाहता कोई, निकलना अपने घर से,
….सभी बैठ जाते है दुबक कर घर में, तेज़ गर्मी के डर से,
……मगर फिर भी खली नहीं कुछ, खेत और बाज़ार भी,
………इतनी गर्मी में भी लोग चले ही जाते हैं वहां,
……न जाने कोंसी आश इन्हें खींचकर ले जाती है,

..ज्येठ की दोपहरी, राजस्थान की गर्म धुल, चारों और छाई वीरानी,
…….बस एकमात्र ठूंठ ही रहा है, खेत में बचा बाकि,
……..जो अपनी बेबसी के साथ, खड़ा है अपनी जगह,
…….कभी कभी कोई भुला भटका हिरन ही शायद
………..खड़ा होता होगा इसकी छाँव में,
….राज्य फूल रोहिडा भी अब वैसा नहीं रहा,

………….चारों और गर्मी का साम्राज्य है,
किसी का मन ही नहीं करता, इस गर्मी में, बहार निकलने का,
….मगर फिर भी ये प्रदेश, सफलता की दोड़ में आगे है,
…………और आगे ही रहेगा, क्यू की यहाँ पर,
…………गर्मी, लू,अकाल, के बावजूद
….है राष्ट्रप्रेम की भावना, आपसी प्रेम और भाईचारा,
………..सभी मिलकर चलते हैं, एक साथ

…..गांवों में दोपहर को भले ही, चौपाल खाली रहे मगर,
……हर शाम होती है वह पर, गाँव के बुजर्गो की भीड़,
……इतनी गर्मी के बाद भी, खेल मैदानों में बहता है प्रेम,
………और निकलती है एक, देश के लिए नई किरण,
………….इस राजस्थान से ।
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