तेरी याद बहुत सताती है

तूने भरा था जो जाम मेरा
जहाँ खुश्बू तेरी अब आती है
वह सलवटें बिस्तरों कि
तेरी याद बहुत सताती है

छोड़ के गई जो खुश्बू तूने
अब नींद किसे यहाँ आती है
रात गुजरती करवटों में
तेरी याद बहुत सताती है

कैसे कोई भुलता जिसे
साथ जागने कि आदत हो
आँखे बरबस बहती है
तेरी याद बहुत सताती है

ऐसे तड़प के जीना क्या
ये जान क्यों नहीं जाती है
बनाले अपनी गुलाम ही सही
तेरी याद बहुत सताती है

दिल दिमाग में बसी हो ऐसी
महफिल भी अब न लुभाती है
हर साँस में तुम बैठी हो
तेरी याद बहुत सताती है

हरि पौडेल
नेदरल्याण्ड
०७-१२-२०१३

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