जलती लौ

बहुत देर तक जलती रही लौ
कभी होती तेज , तो कभी मद्धिम |
लड़ती रही हवाओं से अकेले
जब तेल ने भी छोड़ दिया साथ |
बत्ती जलती रही
अपने तंतुओं को जला -जलाकर ,
तबतक कि वह जलकर
खुद ही राख नहीं हो गयी |
मेरी आँखों में
आज तक बंद है
वह लौ , तंतुओं की जलन
और उनसे बच गयी राख |

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