माल्थस का भूत

कितनी दूर से बुलाये गये
नाचने वाले सितारे
कितनी दूर से मंगाए गए
एक से एक गाने वाले
और तुम अलापने लगे राग-गरीबी
और तुम दिखलाते रहे भुखमरी
राज-धर्म के इतिहास लेखन में
का नही कराना हमे उल्लेख
कला-संस्कृति के बारे में…

का कहा, हम नाच-गाना न सुनते
तो इत्ते लोग नही मरते…
अरे बुडबक…
सर्दी से नही मरते लोग तो
रोड एक्सीडेंट से मर जाते
बाढ़ से मर जाते
सूखे से मर जाते
मलेरिया-डेंगू से मर जाते
कुपोषण से मर जाते
अरे भाई…माल्थस का भूत मरा थोडई है..
हम भी पढ़े-लिखे हैं
जाओ पहले माल्थस को पढ़ आओ…

अरे भाई कित्ता लगता है
एक जान के पीछे पांच लाख न…
विपक्ष भी सत्ता में होता तो
इतना ही न ढीलता…
हम भी तो दे रहे हैं
फिर काहे पीछे पड़े हो हमारे…

अपने गाँव-गिरांव के आम जन को
हम दिखा रहे नाच, सुना रहे गाने
मिटा रहे साथ-साथ, राज-काज की थकावटे
राज-काज आसान काम नही है बचवा…
न समझ आया हो तो जाओ
जो करते बने कर लो….
————————अ न व र सु है ल ————–

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