एलबम की दुनिया – कवि – विनय भारत

“एलबम की दुनिया”

ये एलबम नहीं है
ये झलक है
उन पलों की
जो याद दिलाते है
मानव को सुख की
उन खुशियों की
जो उसने अर्जित की थी
कभी

ये संग्रह है
उन सपनों का
जिनको पूरा करने का
ख्वाव
देखा गया था
उसके द्वारा

ये
एल्बम नहीं
ये तो जिदंगी के
वे खुशनुमा पल है
जो बिताए थे
परिवार के साथ
दोस्तों के साथ
समाज के साथ
दो पल सूकून से
काटा था जीवन
ली थी राहत की साँस

ये तो याद दिलाती है
उस वक्त की
जब घर परिवार
आदि की
चिन्ताओं से
मुक्त होकर
झूम रहा था मन
मस्ती के सागर में

हाँ,
ये सिर्फ एल्बम नहीं है

वास्तव में
ये तो वह छत है
जिसके नीचे
बाप- बेटे का
झगड़ा नहीं
स्नेह
दिखाया जाता हैं
अरे! यही तो वो घर हैं
जहाँ बूढ़ी माँ को
बेटा
गाली नहीं
प्यार के
दो
मीठे बोल
सुनाता हैं

हाँ, यही तो है
वो संसार
जो
पत्नी को
तलाक की नहीं
विवाह की याद
दिलाता हैं

हाँ ,यही तो है
वो घर बार
जो
एक भाई को
भाई से
गले मिलाता हैं

हाँ -हाँ
यही तो हैं वो
जगह जहाँ
एक फटेहाल
गरीब भी
अफसर बनकर
आता है

जी हाँ , यही तो हैं वो
पवित्र जगह
जहाँ
सभ्यता संस्कृति
संसकारों की
सरिता
बहाई जाती हैं
अरे !
यही तो हैं वो जहाँ
मुन्नी बदनाम नहीं
महान दिखाई
जाती हैं
सिर्फ यही,
हाँ ,
यही हैं वो
जहाँ
बहू विदेश से
सास को
मिलने आती है
अरे!
यही तो हैं वो
जो
नाती को
नाना,
पोते को
दादी की गोद दिलाती है
यही तो है जहाँ
छिपा रहता हैं
पिता की मुस्कान
के
पीछे का संघर्ष
यही तो है वो जहाँ
छिपी हैं कालेज के
दिनों की अठखेलियाँ
वो शरारतें
वो कैंटीन
वो दहीबड़े
वो इमलियाँ
वो सखी सहेलों का
हँसीठोला

वो कालेज पिकनिक
वो पहला पहला प्यार

हाँ,हाँ ये सिर्फ
एल्बम नहीं
ये एक दुनिया हैं
आपके जन्म से
बुढापे तक की
ये दुनिया है जो
बताती है
इस दौड – भाग की
जिंदगी में
रूके थे
दो मिनट कभी
इस फोटो को
खिंचाने को

जी हाँ ,
यही है वो
जो शहीद की माँ को
धैर्य बंधाती हैं
यही विश्व को
“वसुधैव कुटुम्बकम्”
सिखलाती है
सिर्फ यही तो हैं जो
भूतकाल को
वापस लाती हैं
यही एल्बम
आंसू और मुस्कान लाती हैं
यही तो हैं जो
रिश्तों की बुनियाद बनाती है
हाँ , ये एल्बम नहीं हैं
ये सिर्फ एल्बम नहीं हैं

कवि विनय भारत