उसे सिखा दूँ

खवाबों की एक पतवार, आई है मेरे द्वार,
मेरे अरमां अधूरे, उसको कैसे पनाह दूँ?
एक शख्स सोया है दुनिया से बेखबर,
अधूरी नींद से भला, उसको कैसे जगा दूँ?
अनजाने से रिश्ते में जुदा हुआ हूँ मैं,
फिर कैसे उसे बदलना सिखा दूँ?
उसके दिल में जगह नहीं प्यार के लिए शायद,
फिर कैसे उसे प्यार से रूबरू करा दूँ?
हर रंग की चमक फीकी लगती है उसे,
फिर कैसे उसके, प्यार का रंग लगा दूँ?
प्यार में दुनिया खुबसूरत लगती है,
इस हकीक़त से उसे कैसे मिला दूँ?
होता नहीं उसे विश्वास किसी पे भी अब,
कहो, उसके दिल में विश्वास कैसे जगा दूँ?
खुद से ही अनजान से रहते हैं वो,
दिल करता है उसे खुद से मिला दूँ ।
जनता हूँ वो कुछ भूलते ही नहीं,
लेकिन हसरत है उनके सरे गम भुला दूँ।
जिन लम्हों को याद कर वो, कही खो से जाते है,
उन लम्हों के लिए उसे, एक ही बार रुला दूँ ।
नफरत के साये में जिंदगी जिया नहीं करते,
चाहत है उसे मोहब्बत करना सिखा दूँ….

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