काश …

काश …

काश मैं तुम से मिला न होता
ये दिन न होती, ये मैं न होता

तू रहती वहीं, हो जहाँ अभी,
अभी  जो है वो वक़्त न होता

क्या मिला  चंद ख़ुशी के सिवा
न मिलता, गर प्यार निभाया होता

शिकायत तुमसे नही, है खुद से मुझे
काश मैं तुम्हें पहचान पाया होता

मैं लिखता यहाँ बेवफा तुम्हे
गर दिल मेरा रोका न होता

एक बार तो झांक के देख
मैं अभी हूँ जहाँ, वहाँ ना होता

मैं भी ख़ुशी चाहता था
मगर सबको ये नसीब नही होता

तू खुश रहती सदा मेरी जिंदगी के बदले
मुझे अपनी मौत पर भी अफ़सोस न होता।

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