गजल -इश्क के जलजले का कहर देख लो |

इश्क के जलजले का कहर देख लो |
ढह गया मेरे’ सपनों का’ घर देख लो ||

दिलरुबा चाँद बनकर बनी सित्मगर |
चाँदनी से जला है जिगर देख लो ||

आँख में झाँकने का जो रखते हुनर |
रात को जागने को असर देख लो ||

किस कदर मेरे दिल पर ढहाया कहर ?
क्यूँ नजर मार दी वो’ नजर देख लो ?

चाह तेरी फली दे रहा हूँ खबर |
हाय बदतर हुआ इक नजर देख लो ||

नाम तेरा यहाँ जुर्म का हमसफ़र |
काम के वास्ते इक शहर देख लो ||

मैं सदा दूर था शायरी से मगर ?
आज शायर बना हूँ हुनर देख लो ||

लुट गयी हर ख़ुशी शिव की है इस कदर |
बन चुका पीर का हूँ जहर देख लो ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी

नोंएडा -०९५८२५१००२९

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