दुल्हन बिदाई गीत

आँगन में आई इक दिन, दाना जो खाई दो दिन,
सँग में गुज़ारी कुछ दिन, अब परदेस को चली ,
चिड़िया हमारी अब परदेस को चली,
बिटिया हमारी अब परदेस को चली।

बाबुल रे मैं अब कौन, देस को चली।

बाबुल की अपने बेटी, हर बात याद रखना,
दुख सारे भूल जाना ,खुशियों का स्वाद चखना,
भईया के साथ खेले, वो खेल याद रखना,
मईया ने जो सिखाया, उसकी भी लाज रखना,
बाबुल की गोद खेली,बहना की थी सहेली,
माँ-भईया की रंगोली,दुल्हन वेश वो चली,
चिड़िया हमारी……
बाबुल रे मैं …….

बेटी हो या हो बेटा , दोनो को एक माना,
कन्या है धन पराया, ये सच है आज जाना,
बाबुल ने जो किया है ,वो फर्ज़ था निभाना,
बेटी का दान शायद , कोई कर्ज था पुराना ,
ये रीत सबने मानी, हर घर कि है कहानी,
आखिर है बेटी जानी, लो आज वो चली।
चिड़िया हमारी……
बाबुल रे मैं …….

सजना के साथ फेरे ,ले अगले घर जो जाऍ,
ऐसी छ्वी बनाना , हम गर्व से समाऍ,
थोडा उन्हे सहोगी , तो घट नही जाओगी,
खुश उनको तुम रखोगी , तो खुशीयाँ ही पाओगी,
तुमसे हमे है आशा , तेरे सुख की है अभिलाषा,
दिल-जोड रखना भाषा , अपनी परीक्षा को चली,
चिड़िया हमारी……
बाबुल रे मैं……..
मुकेश गुजेला ‘बघेल’

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