’’मेरा देश‘‘ (गीत)

2. ’’मेरा देश‘‘ (गीत)

मेरा देश अलौकिक, भारत इसको कहते हैं।
हिन्दू, मुस्लिम, सिख ईसाई, मिलेजुले रहते हैं।
मेरे देश पर आये संकट, मिलजुल सब सहते हैं।
मेरे देश में हिम्मत वाले, योद्धा वीर महान रहते हैं।
मेरे देश के पक्षी ज्ञानी, कथा भागवत कहते हैं।
मेरे देश में शुद्ध सात्विकी, महान तपस्वी रहते हैं।
मेरा देश ……………………………………………. कहते हैं। ………..1
मेरे देश में स्वयं ही ईश्वर अवतार लिया करते हैं।
यीशु, कृष्ण, नानक, रहीम, सबको ईश्वर कहते हैं।
मेरे देश में महान् प्रतिभाएँ, प्रकट हुआ ही करती हैं।
ये प्रतिभाएँ देश धर्म पर, आये दिन ही मरती हैं।
मेरे देश को दुनियाँ वाले, धर्मनिरपेक्ष ही कहते हैं।
मेरे देश में शहीद हुए,भगत, मौलाना,गाँधी कहते हैं।
मेरा देश …………………………………………….. कहते हैं। …………2
मेरे देश में काले गोरे, दोनों रंग के रहते हैं।
देश के चरण पखारे, सागर जिसको कहते हैं।
मेरे देश में बहुभाषाएँ, बहु पहनावेधारी रहते हैं।
मेरे देश में सर्दी-गर्मी, सारे मौसम रहते हैं।
मेरे देश मंे वन, गिरि मुकुट जिन्हें हम कहते हैं।
गंगा जैसी नदियाँ बहतीं, उनमें मोती बहते हैं।
मेरा देश …………………………………………………. कहते हैं। ………3
मेरे देश की माटी सोना, जल अमृत कहते हैं।
मेरे देश में सिंह गाय, साथ-साथ भी रहते हैं।
मेरे देश के पत्थर ऐसे, बन देव दूध वे पीते हैं।
उन देवों को हम सभी, महादेव ही कहते हैं।
मेरे देश में हलचल होती, बलिदान शान से सहते हैं।
मर-मर जन्म यहीं लेंगे, हम बात गर्व से कहते हैं।
मेरा देश ………………………………………………….. कहते हैं। …… 4
मेरे देश में महान सती, साध्वी वीरांगनाबाई रहती हंै।
त्याग तपस्या की गाथाएं, मर मिट कर वे कहती हैं।
युद्ध भूमि में पति जाये तो, स्वागत सिन्दूरी करती है।
विश्व गुरू आदर्श देश की, ये मर्यादा की धरती है।
इन माँ बहिनों की कोखों में, सदा वीर पलते हैं।
इनके पूत चढ़े फांसी, शहीद उन्हें हम कहते हैं।
मेरा देश ………………………………………………… कहते हैं। ……….. 5
मेरे देश के लोग सदा, वसुधैव कुटुम्बकम् कहते हैं।
आपाद् हाल हो कहीं किसी का, स्वयं कष्ट सहते हैं।
विश्व गुरु था मेरा देश, वे सन्त महात्मा रहते हैं।
भूमण्डल के वे सैलानी, गाथा इसकी कहते हैं।
चारों ओर धवल फैलाया, अपने वेद जिन्हें हम कहते हैं।
चारों वेद हैं ज्ञान कहानी, विज्ञान जिसे सब कहते हैं।
मेरा देश ………………………………………………… कहते हैं। ……….. 6

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