किसान

किसान

शीत, ताप
बरखा आघात
जोत हड्डि यां
निचोड़ आंत
बो कर सपने
खुशी उगाता
नि:शेष उदर
निरीह अन्नदाता
सृष्टि का जीवट
आदर्श, वरदान
निराय, निरापद
कृश किसान ।

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