कुछ अलग-अलग विषय पर शेरो-शायरी हो जाए…

हिम्मत कर आज तो पार कर ही लूँगा मैं इस बल खाती नदी को
आखिर कब तक करता रहूँ इंतज़ार लहरों के शान्त होने का
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दिल-विल,प्यार-व्यार, बातें सुन सभी मुकुराने लगे हैं I
लोग हीर को हीर नहीं, रांझे के नाम से बुलाने लगे हैं I
यकीं नहीं था जिन्हे इश्क़ की झूठी सच्ची बातों पे,
वादा निभाने के लिए इन दोनों की कसमें खाने लगे हैं II
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दिल ने दिल से इशारा लेकर मोहब्बत निखार ली I
फूल ने भी खार से सहारा लेकर बगिया संवार ली I
हमें भी बंधी है कुछ ऐसी ही उम्मीद तुमसे सजन,
नदी ने जमीं से किनारा लेकर ज़िंदगी गुज़ार ली II
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अपने जीवन की बैलगाड़ी कभी तो हांका करो I
कभी तुम भी तो भूखे रहो कभी तो फांका करो I
कहते हो सभी से ऐसे नहीं, अरे ! इसे वैसे करो,
छोड़ो य़ार अपने भी अंदर कभी तो झांका करो II
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खुदा ने हुस्न-इश्क़ के दरबार में पैगाम भेजा है I
सितारों ने आसमान से ज़मीं पर सलाम भेजा है I
दिल का आईना भी दिखा देंगे किसी दिन सनम,
मेरे हाथों की लकीरों में बस तेरा ही नाम भेजा है II
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ऐसा कभी दिन न आये कि तुम्हे समझौता करना पड़े I
ऐसा कभी वक़्त न आये कि तुम्हे ज़मीं पर उतरना पड़े I
जीवन के पथरीले रास्तों पर मिलें फूल हमेशा तुम्हे,
ऐसा कभी क्षण न आये कि तुम्हे टूट कर बिखरना पड़े II
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पौध प्रदुषण में दब न जाए अभी तो जल से सींचना बाकी है I
आवाज़ घुट कर रह न जाए अभी तो जोर से चीखना बाकी है I
जिंदगी की सीखों ने सिखाया जीवन जीना हमें सदा यहाँ,
सीखते आये हैं तो क्या अभी भी बहुत कुछ सीखना बाकी है II
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वजह ज़िंदगी की हो जो भी चाहे जीना तो पडेगा I
दुनियाँ ने चाहे जितने दिए जख्म सीना तो पडेगा I
चाहे किया हो हमने अमृत का मंथन तो क्या,
जिंदगी अगर ज़हर भी है तो क्या,पीना तो पडेगा II
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सागर की गहराई नभ की ऊंचाई जान नहीं सकते I
मन की चाह भीतर की थाह पहचान नहीं सकते I
हमसे दूर इस तरह आप, कुछ तो बात है ज़रूर,
वर्ना आप हैं बेवफा हम हरगिज़ मान नहीं सकते II
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छोड़ दो उनके लिए कुछ करना जो तुम्हारे किये का शुक्र तक नहीं करते
छोड़ दो चिंता उनकी व्यर्थ में जो तुम्हारी ज़रा भी फ़िक्र तक नहीं करते
दिल से निकाल कर फेंक दो उन्हें जो ज़िन्दगी से निकल गए कभी के
छोड़ दो यादों को उनकी जो भरी महफ़िल में तुम्हारा जिक्र तक नहीं करते
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मेरे संग संग आपने इस दिन को भी याद रखा,
मेरे ओर मेरे परिवार के लिए इतना ही काफी है I
बीते सालों में कुछ तो गलतियाँ हुई ज़रूर होंगी,
जिसके लिए मेरा ह्रदय माँगता आपसे माफी है II
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आने वाले समय में कहीं कम ना हो यह प्यार,
इसलिए मैं अक्सर घबरा जाता हूँ और डरता हूँ I
आप सच में दिल के बहुत करीब हैं इसलिए ही,
दिल की गहराइयों से आपका धन्यवाद करता हूँ II
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त्रुटि हेतु क्षमा प्रार्थी – गुरचरन मेहता

2 Comments

  1. admin चन्द्र भूषण सिंह 25/12/2013
  2. Rohit pandey (Rinkal Bhai) 10/08/2015

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