मत करना

करना इश्क़ शौक से, किसी के सपने कभी तार तार मत करना I
सम्मान बना रहे सभी का, किसी को कभी शर्मसार मत करना II

बड़ी मुशिकलों से कमाया जाता है पैसा यहाँ जी जान लगाकर,
कोई कितना भी दिखाए यहाँ अपनापन कभी उधार मत करना I

छूना आसमान की ऊंचाई को बेशक पर ज़मीं से जुड़े भी रहना,
देना बड़ों को सत्कार,छोटों को प्यार,कभी अहंकार मत करना I

अपने सपने, अपनी पहचान, अपनी हैसियत होती है सभी की,
बात करना तो सलीके से कभी किसी का तिरस्कार मत करना I

खुदा का शुक्र भी करना, नवाज़ा है उसने सदा बरकतों से तुझे,
न होना मायूस कभी, खुद को गम से कभी बेज़ार मत करना I

अपनी गलतियों से सीखते रहना सच्चाई जीवन की “चरन”
बचना नज़र के नाखून से एक ही गलती बार बार मत करना II
______________________________________
त्रुटि हेतु क्षमा प्रार्थी – गुरचरन मेहता

Leave a Reply