मैंने पूँछा कब आओगे

मैंने पूँछा  कब आओगे,

मेरे मन के सूखे उपवन में,

प्रेम सुधा कब बरसाओगे ……………….. मैंने पूँछा कब आओगे….।

अतृप्त है मन,  संतप्त है तन,

तेरी बेरुखी से, अभिशप्त बना मेरा जीवन।

मिट गई जीने की चाह,

मर गया उत्साह।

आशा दीप जलाने को-

बोलो, बोलो तुम कब आओगे ……………….. मैंने पूँछा कब आओगे….।

मुझको चाहत थी भोग की, मुझे जोग दे दिया,

जोग दे दिया, वियोग दे दिया।

मन है बहुत उदास,

नहीं जीने की कोई आस।

विरहानल से पड़े फफोले-

बोलो मरहम कब लाओगे……………….. मैंने पूँछा कब आओगे…. ।

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