चेन स्नेचर

उसने गली के मोड़ से देखा,
उसके घर के बाहर लगी हुई थी लोगों की भीड़।
कुछ लोग अन्दर जा रहे थे,
कुछ बाहर आ रहे थे।
वह आशंकित होकर बढ़ चला तेजी से–
और हो गया घर में प्रविष्ट।
सहन में खड़ी उसकी माँ के इर्द गिर्द खड़े थे लोग–
और देख रहे थे उसकी छिली गर्दन।
वे कर रहे थे तरह तरह की बातें।
कुछ कोस रहे थे उस चेन स्नेचर को–
जो झपट्टा मार कर ले उड़ा था उनके गले से सोने की चेन।
कुछ दे रहे थे परामर्श पुलिस में लिखाने को बारदात की रिपोर्ट–
और कुछ कर रहे थे आकलन नुकसान का।
वह सब कुछ सुनता हुआ टटोल रहा था–
अपनी पेंट की जेब में पड़ी सोने की चेन,
कभी देखने लगता था-
माँ के गले में पड़े निशान को।
उसने जेब से निकाल कर–
लेली चेन अपने हाथ में।
कहते हुए,’ओह माँ वह तुम थीं ,’ रख दी चेन–
माँ की हथेली पर।
वह आश्चर्य से देखने लगीं हथेली पर रखी अपनी चेन–
और सामने खड़े अपने बाइकर सुपुत्र को।
पुत्र का यह रूप देख कर वह रह गईं थीं हत्प्रभ–
और शर्म से झुक गई थी उनकी छिली गर्दन।

4 Comments

  1. gopi 14/12/2013
    • Jayanti Prasad Sharma Jayanti Prasad Sharma 16/12/2013
  2. Rinki Raut Rinki Raut 15/12/2013
    • Jayanti Prasad Sharma Jayanti Prasad Sharma 16/12/2013

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