ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

जो भजे इस नाम को

भवसागर से तर जाए

याद किया द्रौपदी ने भरी सभा में

लाज बच गई

पुकारा गज ने बीच सरोवर

आफत टल गई

वन्दना करु मैं तेरी सरकार

तेरी जय हो हे जग के पालनहार I

 

तु ही कर्म, तु ही तकदीर

तु ही चोला फकीरी का

कोई दो वक्त की रोटी को तरसे

कोई चखे स्वाद अमीरी का

तु ही शेर की दहाड है

तु ही पर्वत पहाड है

आत्मा तेरा ही अंश है

तु ही सर्प का दंश है

तु ब्राह्मण, तु ही क्षत्री

ये सारा जग तेरा ही वंश है

वन्दना करु मैं तेरी सरकार

तेरी जय हो हे जग के पालनहार I

 

तु ही ब्रहमा, शिव, महेश है

तु ही अल्लाह, तु ही नरेश है

तु ही श्याम बिहारी, कृष्ण मुरारी

तु ही वेदों का ज्ञानी वो ब्राह्मण परशुधारी

तुझसे जन्म, तुझसे मरण

तुझसे ही ये सारा जीवन

तु ही भाग्य विधाता, जननी माता

तु ही बन्धु, तु ही सखा है

एक तु अटल सत्य है

बाकी सब बेवफा है

वन्दना करु मैं तेरी सरकार

तेरी जय हो हे जग के पालनहार I

 

तु ही योद्धा की तलवार है

तु ही गरीब की पुकार है

तु ही जवान, तु ही किसान है  

तु ही बाग बगीचा खेत खलिहान है

तु ही घट-घट का वासी

तु ही रामायण, गीता का ज्ञान है

तुने पापी कंस को मारा

तुने सुदामा गरीब को उभारा

तेरी मित्रता सर्वोपरी है

जिसके पास तेरे जैसा साथी

उसके पास क्या कमी है  

वन्दना करु मैं तेरी सरकार

तेरी जय हो हे जग के पालनहार I

 

तु ही मृग नैन और सुख चैन है

तु ही कोठी, बंगला और हवेली

तु ही जीने का सार, जिन्दगी की पहेली

तु ही पृथ्वी की भार है

तु ही काशी, मथुरा, हरिद्धार है

तु ही वृहस्पति का ज्ञान है

तु ही तिरंगे की शान है

तु ही माँ की ममता, पिता का दुलार है

तु ही दुष्टों का संहार, भक्तो का यार है

भजा नही जिसने तुझको, वो जीवन बेकार है

वन्दना करु मैं तेरी सरकार

तेरी जय हो हे जग के पालनहार I

 

तु ही तरुण, तु ही वरुण

तु ही विज्ञान की खोज है

तु ही हाकिम, तु ही वैध

तु ही गरीब का निवाला, शाही भोज है

तु ही चाँद, तु ही सूरज

तु ही तारे, अग्नि, वायु की चाल है

तु ही सागर की गहराई, आसमान की उँचाई

प्रकृति का कहर आंधी भूचाल है

वन्दना करु मैं तेरी सरकार

तेरी जय हो हे जग के पालनहार I

 

तु ही सोना, तु ही चांदी

तु ही हीरों की खान है

तु ही भंवरा, तु ही फूल है

तु ही सब ग्रन्थों की जान है

तु ही अर्जुन का तीर है

तु ही सागर का नीर है

भक्तों के साथ रहता सदा

तु ही द्रौपदी का चीर है

वन्दना करु मैं तेरी सरकार

तेरी जय हो हे जग के पालनहार I

 

सुन लो मेरी पुकार

फिर ले नया अवतार

हो धर्म की स्थापना

कर भारत भूमि का उद्धार

मेरा कर्म, मेरा धर्म

मेरा ये सम्पूर्ण जीवन

तेरे ही चरणो में निहित है

कर दया इस कुलदीप वशिष्ठ पर

रोम-रोम मेरा गाता तेरे ही गीत है

वन्दना करु मैं तेरी सरकार

तेरी जय हो हे जग के पालनहार I

 

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