माँ

केहुनी के बल रेंग-रेंग कर,
कब पैरों के बल खड़ा हुआ ।
ममता माँ की ठाव छाव में,
क्या जानू कब बड़ा हुआ ।
टीका काला माथे मढ़कर,
माँ ममता का आशीर्बाद दिया ।
ऊच ललाट सुन्दर काया,
प्रभु ने था परसाद दिया ।
माँ जो हूँ तेरा बच्चा हूँ,
तूने सच्चा प्यार किया ॥

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