शिवस्तुति

शिवा कान्त की बोलो जय,
करुणा कर सब कष्ट हरेंगे, कर देंगे तुमको निर्भय ………शिवाकांत………..।
महादेव देवाधिदेव, मेरे आराध्य तुम एक मेव,
मूलाधार प्रभु तुम मेरे मुझको आलम्बन सर्वदा त्वमेव।
प्रभु मेरे दुःख दूर करेंगे नहीं कोई इसमें संशय ………..शिवाकांत…………..।
हे विश्वनाथ हे कृपानिधान, हर चेहरे को दो मुस्कान,
रहें सर्वदा सुखीजन कोई ना हो दुःख से हलकान।
शिवशंकर कल्याण करो, तुम मृत्युभय दूर करो मृत्युजंय……..शिवाकांत…..।
आक धतूरा भोग में पाते, केवल जल से खुश हो जाते,
जलाभिषेक जो करते, शिव का अनायास वांछित पा जाते।
भर देते भण्डार भक्त का निर्धनता का कर देते हैं क्षय……….शिवाकांत……. ।
जय नीलकन्ठम, विश्वनाथम् ,
गंगेश्व्ररम , रामेश्व्ररम
जय प्रलयकरम , कपालेश्व्ररम
कुमारेश्व्ररम, प्रतिेज्ञेश्व्ररम।
भक्तिभाव से कर वंदन, उमाकान्त की बोलो जय…………..शिवाकांत…….. ।

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