मै कौन हूँ?

लोग अक्सर पूंछते हैं मुझसे-

मै कौन हूँ मेरी पहचान क्या है?

मै हो जाता हूँ किंकर्तव्य विमूढ़,

नहीं सोच पाता हूँ-

अपने को परिभाषित करने के लिये क्या करूँ!

किस व्यक्तित्व  से अपने आपको

सम्बद्ध करूँ।

ना पहचाने जाने का यह दंश-

मुझे सदैब ही त्रस्त कर देता है।

अब जब अपना लिया है तुमने ,

मुझे स्वत: ही पहचान मिल गई है

मै अब बेझिझक, बेलाग उनका हूँ कहकर-

लोगों के प्रश्नो का समाधान कर देता हूँ।

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