मोला सुरता हे ,

मोला सुरता हे , वो रस्सी के खटिया .जम्मो झन, गोठियावन सारी रतिहा .
उपर बादर डाहर चंदैनी बगरे राहय.नीचे चलत रहय हमार मन की बतिया .

डोकरा बबा कहय सरवन कुमार के कहनी .ओधे राहन हमन जम्मो भाई बहिनी .
डोकरी दाई के चले , ध्रुव तारा के कथा .सुने में आवे संगी , तब अडबड मजा .

दाई आवय , मुड़ी ल सहलावय..बरसय धारे धार वोखर मया ..
बाबू के पंछा ल फिन्जो के .धूकन वोला , जुड़ जुड़ हवा ..

तईहा के बात ल अब बईहा ले गे .अब ते कखरो मेर बोले के बेरा नई ये .
वईसन सुग्घर अब रतिहा अऊ..अपन मया के कहूँ कना डेरा नई ये .

( सुरता = याद , खटिया = खाट, जम्मो = सब , गोठियाना = बातचीत करना , कहनी = कहानी , दाई = माता, ददा = पिता, डोकरा ददा = दादा जी , डोकरी दाई = दादी , पंछा = अंगोछा , फिन्जो = भिगाकर , धूकन = हवा करना , तईहा – तब के .. बईहा = दीवाना पागल , सुग्घर = सुन्दर , मया = मोहब्बत , बेरा = समय , अडबड = बहुत , मुडी = सर , कखरो = किसी का )
सादर नमन ..

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