आजादी का पर्व

 

आजादी का आया है पर्व,उल्लास मनायें

भूखे पेटों ,  नंगे पैरों ,चिथड़ो में लिपटे जन

भारत का उपहास  उड़ायें .आजादी का आया है पर्व ,…../

है मिलते नहीं अन्न के टुकड़े ,

न  रहने को घर पायें ,

अब चलो चाँद पर घर बनवायें

आजादी का आया है पर्व ,……….

जाति ,धर्म औ ‘वर्ग विभाजन

खंडन स्वदेश   का  भाए

पोषित होती  ऐ   भावनाये ,

आजादी का आया है पर्व ,…………

जल ,थल ,नभ   में

बढ़  रहा प्रदुषण

गंगा -यमुना   विकलाये,

आजादी का आया है पर्व ,……….

पाश्चात्य  सभ्यता  का विकास

नैतिक मूल्यों का हो रहा ह्रास ,

खुद  की संस्कृति   चिल्लाये

आजादी  का आया है पर्व ,………

नारी पर बढ़ता अत्याचार

पोषित होते दूषित विचार

सबला   अबला कहलाये

आजादी आया है पर्व ,……….

गढ़ रहे विकास  की गाथाएं

मन ही मन मुस्काएं

नष्ट  प्रकृति   चिल्लाये

आजादी का आया है पर्व ,…….

दुखी ह्रदय से ‘उत्पल’

भारत को शीश नवाए

जय -जय भारत ,जय -जय भारत

उच्च  स्वरों में गायें

आजादी का आया है पर्व ,उल्लास मनाये .

Leave a Reply