जब आँख खुले तो धरती हिन्दुस्तान की हो

जब आँख खुले तो धरती हिन्दुस्तान की हो
जब आँख बंद हो तो यादे हिन्दुस्तान की हो
मै मर भी जाऊ तो कोई गम नही,
लेकिन मरते वक्त मिट्टी हिन्दुस्तान की हो

थोड़ी मस्ती थोड़ा सा ईमान बचा पाया हूँ।
ये क्या कम है मैं अपनी पहचान बचा पाया हूँ।
कुछ उम्मीदें, कुछ सपने, कुछ महकी-महकी यादें,
जीने का मैं इतना ही सामान बचा पाया हूँ

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