यदि देश हित मरना पड़े मुझ को सहस्त्रों बार भी

यदि देश हित मरना पड़े मुझ को सहस्त्रों बार भी ।तो भी न मैं इस कष्ट को निज ध्यान में लाउं कभी ।। हे ईष भारतवर्ष में शत बार मेरा जन्म हो ।कारण सदा ही मृत्यु का देशोपकारक कर्म हो ।। सर फ़रोशाने वतन फिर देखलो मकतल में है ।मुल्क पर कुर्बान हो जाने के अरमां दिल में हैं ।। तेरा है जालिम की यारों और गला मजलूम का ।देख लेंगे हौसला कितना दिले कातिल में है ।। शोरे महशर बावपा है मार का है धूम का ।बलबले जोशे शहादत हर रगे बिस्मिल में है ।।

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