फिर तुम क्यों आए ???

फिर तुम क्यों आए ???

सोया था आराम से,
शून्य की कब्र में ,मन उन्माद को सीने से लगाए,
यह जन्म तो बीता न था,
फिर तुम क्यों आए ???

दुनिया इतनी भी छोटी नहीं कि,
तेरी यादों ने मेरी वेदनाओं का पता लगा लिया,
खुशियाँ ताउम्र बैरंग लौटती थी,
फिर तुम किस दरख़्त से आए.
क्योंकर आए ??
यह जन्म तो बीता न था,
फिर तुम क्यों आए ??

जानता हूँ कुछ देर ठहरोगी,
फिर अंतहीन शून्य में खो जाओगी,
फिर भी बार-बार मरीचिका बन,
क्योंकर कस्तूरी फैलाए ??
यह जन्म तो बीता न था,
फिर तुम क्यों आए ???

कहो तो नियति से फिर शत्रुता मोल लेता हूँ,
बोतल में बंद जीन को खोल देता हूँ,
पर डरता हूँ कहीं नियति से शत्रुता फिर से भारी न पड़ जाए,
कहीं दंड स्वरुप मुझे वो एक औऱ जन्म न तड़पाए,
यह जन्म तो बीता न था,
फिर तुम क्यों आए ???

मेरी भावनाओं को यूँ ही बंद पड़े रहने दो,
ताबूत में औऱ जंग लगने दो,
निर्वात मन में क्यों वायु का संचार कराएं,
यह जन्म तो बीता न था,
फिर तुम क्यों आए ???

 

-बिकास चन्द्र राव

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