चाय…

कभी आओ,
घर पे.
बैठो करीब,
दो गल्लां करेंगे.

छानेंगे चाय,
उजले सफ़ेद कपों में.
और सेकेंगे –
अपनी रूह,
कपों को थामे, चाय की गर्मी से.

बचेगा –
बस वो हिस्सा,
चाय का, या बातों का,
जो अब जरूरी नहीं.

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