लावारिस

कूड़े के ढेर पर पड़े उस लावारिस शिशु के आसपास-

खड़ा था लोगों का हुजूम।

लोग कर रहे थे तरह तरह की बातें।

कोई कोस रहा था उसकी निर्दयी माँ को-

और कोई चिन्तित था उसके भविष्य को लेकर।

उसके वर्तमान की करुण क्रंदन की-

नहीं थी किसी को कोई चिन्ता।

एक सद्द  प्रसूता कुतिया सुनकर बच्चे का रुदन-

लोगों के बीच से निकल कर जा पहुँची उसके पास।

जब तक कोई कुछ समझता उसने लगा दिया-

अपना थन उस बच्चे के मुँह से।

बच्चा रोना बन्द कर चुषुक चुषुक पीने लगा उसका दूध-

और कुतिया भोगने लगी मातृत्व का परम सुख।

उस भीड़ में पीछे खड़ी, लोक लाज की मारी बेबस माँ ने देखा-

उस कुतिया को कृतज्ञता से।

वह कर उठी सीत्कार और लगी रोने निशब्द।

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