भूल जायेंगे

लंगूरों को मिल जाएँ अंगूर तो जनाब वो हूर भूल जायेंगे I
पता है नेता कुर्सी मिलते ही जनता को जरुर भूल जायेंगे II

एक बार जो आ गए शासन में तो कसम से सच कहता हूँ ,
कुरेदेंगे दूसरों के जख्म ये, और अपने नासूर भूल जायेंगे I

कुक्कर भी इनकी सीटी भी इनकी दाल भी इन्ही की होगी,
चटपटी बनाने कि कोशिश करेंगे पर, आमचूर भूल जायेंगे I

टकरा जाए कोई जो इन्हें इनके जैसा ही आमने सामने,
उतरे हुकूमत का नशा कम्बख्त सारा सुरूर भूल जायेंगे I

जेबें फिर से भरने को आयेंगे वोट मांगे दोबारा तब,
पांच साल नशे की सत्ता में थे कितने चूर भूल जायेंगे I

यूँ समझ लीजिये कि याद रहेगी तो बस गन्दी राजनीति,
उस पैदा करने वाले को भी भाई साहब, हुजूर भूल जायेंगे II
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त्रुटि क्षमा हेतु प्रार्थी — गुरचरन मेहता

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