चुनाव तो आने दो आने दो यार

दल बदलुओं का देखना तुम कारोबार I
चुनाव तो आने दो आने दो यार II
दोगलों का चाहो जो करना दीदार I
चुनाव तो आने दो आने दो यार II

तन के गोरें पर मन के काले हैं ये I
बड़े भोले, पर अंदर से भाले हैं ये I
ना समझो तुम सुख की चाबी इन्हे,
झूठे वादों के मोटे मोटे ताले हैं ये I

कसमें वादों का चाहो जो देखना बाज़ार I
चुनाव तो आने दो आने दो यार II

अभी तो हमारे कष्ट ये भगाएंगे I
बाद में लूटकर हमें ही खा जायेंगे I
जनता रोती बिलखते रहेगी सदा,
ये फिर से वही भ्रष्टाचार फैलाएंगे I

इनकी नैया इन्ही की होगी पतवार I
चुनाव तो आने दो आने दो यार II

झूठ से इनके गहरे रिश्ते-नाते हैं I
पल में ये जनता को बहकाते हैं I
दूख बांटने को हमारे बीच रहेंगे,
पर जाते जाते सुख भी ले जाते हैं I

इनकी वाणी में होती गज़ब की धार I
चुनाव तो आने दो आने दो यार II

महंगाई तो नेताजी के संग हो गई I
और ज़िंदगी हमारी बेरंग हो गई I
जीतने का इन्हें हथियार मिल गया,
जनता तो फिर से अपंग हो गई I

होंगे जनता के सपने फिर से तार तार i
चुनाव तो आने दो आने दो यार II
दिल करता पहना दूँ इन्हे जूतों का हार
चुनाव तो आने दो आने दो यार I
चुनाव तो आने दो आने दो यार II
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त्रुटि क्षमा हेतु प्रार्थी — गुरचरन मेहता

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