हद कर दी

मुसीबतों और ठोकरों ने भी हमारे रास्ते में बढ़ बढ़ कर हद कर दी I
हम भी तो थे गैरतमंद बहुत, सो हमने भी लड़ लड़ कर हद कर दी I

पिताजी कहते थे नालायक कुछ बन जाता ‘मेरे रहते तो अच्छा है, ‘
बात लग गई दिल को बस हमने भी किताबें पढ़ पढ़ कर हद कर दी I

सच की अहमियत को जाना जिंदगी के तजुर्बों के साथ साथ हमने,
ऐसा चढ़ा हमें जुनून कि,सच्चाई की मूरत गढ़ गढ़ कर हद कर दी I

पुरे परिवार का साथी कितना हरा भरा वृक्ष था मेरे आंगन का वो,
ऐसा घेरा पतझड़ ने के सभी पत्तों ने भी झड़ झड़ कर हद कर दी I

पूर्व प्रेमिका ने मिलवाया अपने बच्चों से यह कहकर कि ‘मामा हैं’
बच्चे दो कदम आगे कम्बख्तों ने पीठ पर चढ़ चढ़ कर हद कर दी

वो बचपन से कहता था मैं ही तेरा सच्चा दोस्त हूँ यकीं कर “चरन”
और जवानी में अपने सारे दोष मेरे सर पर मढ़ मढ़ कर हद कर दी II
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सर्वाधिकार सुरक्षित — त्रुटि क्षमा हेतु प्रार्थी — गुरचरन मेहता

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