Health in Poems…5 – स्वास्थ्य रक्षक कविता

दिन   में तो  चंदा चलै ,चलै  रात में  सूर |

तो यह निश्चय जानिये,  प्राण गमन बहु दूर||

बायीं  करवट   सोइये,  जल  बायें स्वर  पीव |

दायें स्वर  भोजन करै,  सुख  पावत है  जीव ||

अधिक गर्म जो पेय पिये, और अन्न जो खाय | 

वृद्धावस्था  के  पूर्व ही, बत्तीसी झड़ जाय || 

जो दातून   बबूल की ,नित्य करै  मन लाय |

टीस मिटै  मजबूत हो, पायरिया  मिट जाय ||

नीम   दतूनी  जो करै, भूनी अन्न   चबाय  |

दूध बयारी जो करै,ता घर वैद्य न जाय  ||

Leave a Reply