आदमी हूँ।

मत समझना कि दीवाना आदमी हूँ,
आजकल का मैं पुराना आदमी हूँ।

देखता हूँ आँख में तहजीब सबकी,
मुंह लगाने में सयाना आदमी हूँ।

दुखों के ज्वालामुखी से निकल आया,
आग से मत आजमाना आदमी हूँ।

चाहने वाला नहीं अब तक मिला है,
यार मैं भी आशिकाना आदमी हूँ।

एक जैसी ज़िंदगी चलती नहीं है,
रूठ जाऊँ तो मनाना आदमी हूँ।

बहुत मेहनत से कमाया है भरोसा,
बिना पैसे के बयाना आदमी हूँ।

जानवर या देवता का पद न देना,
आदमी मुझको बताना आदमी हूँ।

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