प्रेम

हमारे देश में शादी का मतलब प्रेम नहीं समझोता है

इसीलिए भारत में तलाक बहुत कम होता है

हमारे यहाँ प्रेम सिनेमा हाल में दिखाया जाता है

जबकि विदेशो में उसे प्रैक्टिकल रूप में अपनाया जाता है

क्या आप विदेशों में होने वाले अधिक तलाक़ के कारण को जानते हो

या फिर इसे उनके भाग्य की विडम्बना मानते हो

प्रेम, तलाक का पहला खंड है हमारे यहाँ अरेंज मैरिज़ है

इसीलिए ये रिश्ता अखंड है अरेंज यानि एग्रीमेंट

तसल्ली से न की अर्जेंट तू मेरा घर संभाल

म तेरे गहनों की ज़रूरत पूरी करूँगा

तू मेरे बच्चे पाल मे तनख्वाह तेरे हाथ पर धरूँगा

विदेशों में -तू भी कमा, म भी कमाउंगा

तुम नाश्ता तैयार करो म डिनर पकाउंगा

हम उनकी तरह दिल से नहीं दिमाग से जीते है

यही फर्क है की वो काकटेल और हम भ्श का दूध पीते है

कभी किसी ने ये नहीं पढ़ा होगा की फलां जगह कितने लोगो ने प्रेम किया

लेकिन कितने लोगो का तलाक हुआ ये प्रथम पृष्ठ पर पड़ता है दिखाई

क्योंकि उनका प्रेम ; प्रेम नहीं वासना है और वासना होती है अशतही

हम तो केवल प्रभु से प्रेम करना जानते है और केवल इसी सच्चाई को पहचानते है

जब वे इस वासनिक प्रेम को छोड़ वास्तविकता के धरातल पर आयेंगे

तब जीवन की हर राह में  खुशियाँ ही खुशियाँ पायेंगे

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