सुना है, तू मशहूर हो गया है,

सुना है, तू मशहूर हो गया है,
अपने फ़ज़ल से, फलसफा हो गया है.
पर मेरे अज़ीज़-
अब इंतेज़ार मिलने का, कुछ ज़्यादा हो गया है.
कल ही तो मिला था, चश्मे-अदीब,
ओ’ कह गया,
के बढ़ रही है, सुफेदी बलों में.
पता है ना,
लम्हों लम्हों में, सफ़र पूरा हो गया है.

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