किस्मत

तमीज तो देखो इन तमीजदारों की,
कीमत आंक रहे हैं जो उपहारों की।

शत्रु मित्र का भेश बदलकर आते हैं,
कमी नहीं है दुनिया में अय्यारों की।

ऐसा नहीं कि हमने जीना छोड़ दिया,
बस उम्मीदें रखते नहीं बहारों की।

पहले देश रहा गोरों की जूती पर,
अब ठोकर में है काले मक्कारों की।

उनके वादे टिकते नहीं धरातल पर,
दुनिया दिखा रहे हैं चाँद सितारों की।

मेरे बच्चों की चीखें जो न सुन सका,
क्यों मैं कथा सुनूँ उसके अवतारों की।

सहनशक्ति की मर्यादा संकुचित करें,
सीमा नहीं जगत में अत्याचारों की।

दौलत, चाहत, नाम नौकरी वालों का,
क्या आएगा किस्मत में बेकारों की।

 

2 Comments

  1. कुलदीप वशिष्ठ 29/11/2013
  2. Rinki Raut Rinki Raut 29/11/2013

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