मर्जी का हक़

है तेरी मर्जी है
मुझे तू चाहे या मुक़र जाए
मेरे साथ दे या न दे
मेरे बातो को सुने या अनसुना करे
देखे या मुह मूड ले

तेरी मर्जी है
पर इंसानियत भी एक शब्द
सुना है मैंने
क्या तूने भी सुना है
अगर है तो तुम्हे तो पता
होगा ही
तुम्हे हक़ है ना पसंद करने का
नही है हक़ किसी की बेइजती करने का

अपने फयदा के लिए मेरे नुकसान पहुचाने का
अपनी मर्जी से किसी के जिंदगी से खेल जाने का
बस अपनी मर्जी के लिए
कुछ भी कर देने का

Leave a Reply