तेरा साथ

ज़िन्दगी के हर पल में, मुझे तेरा साथ चाहिए
मेरे शब्दों को तेरा समर्थन चाहिए
हर एक सपने में तेरी तस्वीर चाहिए
गिरते हुए अंशु को तेरा किनारा चाहिए
हर एक कविता को तेरी प्रेरणा चाहिए
हर एक गीत को तेरा सुर चहिये
मेरे हर साँस में तेरे खुशबू चाहिए
मुझे सिर्फ तू और तू चाहिए…………
इन लबों को तेरे लबों का एहसाह चाहिए
इस तन को तेरे हाथों का स्पर्श चाहिए
सूरज की पहली किरण,बारिस की पहली बूंद मैं तेरा साथ चाहिए
जाड़ों की ठंडी हवाओ मैं तेरे हाथों हर चाहिए
मुझे सिर्फ तू चाहिए सिर्फ तू चाहिए

(ये रचना मेरी नहीं है मेरे दोस्त ने प्रेम के भावनावो में बह कर मुझे लिख कर दी थी,ये रचना लेखक को समर्पित है)

One Response

  1. जैन 25/11/2013

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